श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.1.9 
मध्य - लीला सड्गाक्षेपेते करिलें वर्णन ।
अन्त्य - लीला - वर्णन किछु शुन, भक्त - गण ॥9॥
 
 
अनुवाद
मैंने श्री चैतन्य महाप्रभु की मध्य-लीलाओं का संक्षेप में वर्णन किया है। अब मैं उनकी अंतिम लीलाओं, जिन्हें अंत्य-लीला कहा जाता है, का कुछ वर्णन करने का प्रयास करूँगा।
 
I have briefly described the pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu in the Madhya-lila. Now I will attempt to describe his final pastimes, which are called Antya-lila.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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