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श्लोक 3.1.87  |
अन्यथा ए अर्थ कार नाहि हय ज्ञान ।
तुमि पूर्वे कृपा कैला, करि अनुमान ॥87॥ |
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| अनुवाद |
| "अन्यथा कोई भी इसका अर्थ नहीं समझ सकता था। इसलिए मैं अनुमान लगा सकता हूँ कि पहले आपने उस पर अपनी अहैतुकी कृपा की थी।" |
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| "No one could have understood its meaning otherwise. Therefore, I presume that you have already bestowed your causeless grace upon him." |
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