श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.1.87 
अन्यथा ए अर्थ कार नाहि हय ज्ञान ।
तुमि पूर्वे कृपा कैला, करि अनुमान ॥87॥
 
 
अनुवाद
"अन्यथा कोई भी इसका अर्थ नहीं समझ सकता था। इसलिए मैं अनुमान लगा सकता हूँ कि पहले आपने उस पर अपनी अहैतुकी कृपा की थी।"
 
"No one could have understood its meaning otherwise. Therefore, I presume that you have already bestowed your causeless grace upon him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)