श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  3.1.81 
हेन - काले प्रभु आइला ताँहारे मिलिते ।
चाले श्लोक देखि प्रभु लागिला पड़िते ॥81॥
 
 
अनुवाद
उस समय श्री चैतन्य महाप्रभु उनसे मिलने वहां गये और जब उन्होंने छत में धकेले गये पत्ते को देखा तथा श्लोक को देखा तो उन्होंने उसे पढ़ना शुरू कर दिया।
 
At that time Sri Chaitanya Mahaprabhu came to meet him there and when he saw the palm leaf kept in the roof and saw the verse, he started reading it.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd