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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट
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श्लोक 63
श्लोक
3.1.63
प्रसाद खाय, ‘हरि’ बले सर्व - भक्त - जन ।
देखि’ हरिदास - रूपेर हरषित मन ॥63॥
अनुवाद
जब हरिदास ठाकुर और रूप गोस्वामी ने देखा कि सभी भक्त प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं और हरि के पवित्र नाम का जप कर रहे हैं, तो वे दोनों बहुत प्रसन्न हुए।
When Haridasa Thakura and Rupa Goswami saw that all the devotees were taking prasad and chanting the holy name of Hari, they both became very happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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