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श्लोक 3.1.49  |
हरिदास - रूपे लञा प्रभुवसिला एक - स्थाने ।
कुशल - प्रश्न, इष्ट - गोष्ठी कैला कत - क्षणे ॥49॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु तब हरिदास और रूप गोस्वामी के साथ बैठे। उन्होंने एक-दूसरे से शुभ समाचार पूछा और फिर कुछ देर तक आपस में बातें करते रहे। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu then sat down with Haridasa and Rupa Goswami. They inquired about each other's well-being and then conversed for some time. |
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