श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.1.46 
हरिदास - ठाकुर ताँरे बहु - कृपा कैला ।
‘तुमि आसिबे, - मोरे प्रभु ये कहिला’ ॥46॥
 
 
अनुवाद
स्नेह और दया से प्रेरित होकर, हरिदास ठाकुर ने श्रील रूप गोस्वामी से कहा, "श्री चैतन्य महाप्रभु ने मुझे पहले ही सूचित कर दिया है कि आप यहाँ आएंगे।"
 
Haridasa Thakura, out of love and kindness, told Srila Rupa Goswami, “Sri Chaitanya Mahaprabhu has already informed me that you will come here.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)