श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.1.44 
ब्रज - पुर - लीला एकत्र करियाछि घटना ।
दुद्ध भाग करि’एबे करिमु रचना ॥44॥
 
 
अनुवाद
"मैंने वृन्दावन और द्वारका में भगवान कृष्ण द्वारा की गई सभी लीलाओं को एक ही कृति में संकलित किया है। अब मुझे उन्हें दो नाटकों में विभाजित करना होगा।"
 
"I have compiled all the pastimes performed by Lord Krishna in Vrindavan and Dwaraka in one book. Now I must divide them into two plays."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)