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श्लोक 3.1.41  |
रात्रे स्वप्ने देखे, - एक दिव्य - रूपा नारी ।
सम्मुखे आसिया आज्ञा दिला बहु कृपा करि’ ॥41॥ |
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| अनुवाद |
| सत्यभामापुर में विश्राम करते समय उन्होंने स्वप्न देखा कि एक दिव्य सुन्दरी स्त्री उनके समक्ष आई और अत्यन्त दयालुतापूर्वक उन्हें निम्नलिखित आदेश दिया। |
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| While resting in Satyabhamapur, he had a dream in which a divinely beautiful woman appeared before him and graciously gave him this order. |
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