श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.1.41 
रात्रे स्वप्ने देखे, - एक दिव्य - रूपा नारी ।
सम्मुखे आसिया आज्ञा दिला बहु कृपा करि’ ॥41॥
 
 
अनुवाद
सत्यभामापुर में विश्राम करते समय उन्होंने स्वप्न देखा कि एक दिव्य सुन्दरी स्त्री उनके समक्ष आई और अत्यन्त दयालुतापूर्वक उन्हें निम्नलिखित आदेश दिया।
 
While resting in Satyabhamapur, he had a dream in which a divinely beautiful woman appeared before him and graciously gave him this order.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd