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श्लोक 3.1.38  |
रूप - गोसाञि प्रभु - पाशे करिला गमन ।
प्रभुरे देखिते ताँर उत्कण्ठित मन ॥38॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् रूप गोस्वामी श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने के लिए चले गये, क्योंकि वे उनसे मिलने के लिए बहुत उत्सुक थे। |
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| Then Rupa Goswami set out to see Sri Chaitanya Mahaprabhu, as he was very eager to see him. |
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