श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 214
 
 
श्लोक  3.1.214 
चारि मास र हि’ सब प्रभुर भक्त - गण ।
गोसाञि विदाय दिला, गौडे करिला गमन ॥214॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु के सभी भक्तों ने उनके साथ चार महीने बिताए। फिर भगवान ने उनसे विदा ली और वे बंगाल लौट गए।
 
In this way, all of Sri Chaitanya Mahaprabhu's devotees spent four months with him. Then Mahaprabhu bid them farewell and returned to Bengal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)