श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  3.1.211 
श्री - रूप कहेन , - “आमि किछुइ ना जानि ।
येह महाप्रभु कहान, सेह कहि वाणी” ॥211॥
 
 
अनुवाद
श्री रूप गोस्वामी ने कहा, "मैं कुछ भी नहीं जानता। मैं केवल वही दिव्य शब्द बोल सकता हूँ जो श्री चैतन्य महाप्रभु मुझसे कहलवाते हैं।"
 
Srila Rupa Goswami said, "I don't know anything. I can only speak the divine words that Sri Chaitanya Mahaprabhu tells me to say."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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