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श्लोक 3.1.207  |
अद्वैत - नित्यानन्दादि सब भक्त - गण ।
कृपा करि’ रूपे सबे कैला आलिङ्गन ॥207॥ |
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| अनुवाद |
| अद्वैत आचार्य, नित्यानन्द प्रभु और अन्य सभी भक्तों ने रूप गोस्वामी को गले लगाकर उन पर अपनी अहैतुकी कृपा दिखाई। |
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| Advaita Acharya, Nityananda Prabhu and all the other devotees embraced Rupa Goswami and showed their causeless mercy upon him. |
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