मोर मुखे ये सब रस करिला प्रचारणे ।
सेइ रस देखि ए इ इहार लिखने ॥204॥
अनुवाद
“मैं देखता हूँ कि दिव्य प्रेम के सम्बन्ध में जो सत्य आपने मेरे मुख से कहे हैं, वे सब श्रील रूप गोस्वामी के ग्रन्थों में स्पष्ट किये गए हैं।
“I see that the truths regarding the transcendental essence that you have established through my mouth are all discussed in the works of Srila Rupa Goswami.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥