श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 203
 
 
श्लोक  3.1.203 
राय कहे , - “ईश्वर तुमि ये चाह करिते ।
काष्ठेर पुतली तुमि पार नाचाइते” ॥203॥
 
 
अनुवाद
श्रील रामानंद राय ने श्री चैतन्य महाप्रभु को उत्तर दिया, "हे प्रभु, आप पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं। यदि आप चाहें, तो लकड़ी की गुड़िया को भी नचा सकते हैं।"
 
Srila Ramanand Rai replied to Sri Chaitanya Mahaprabhu, “O Lord, You are the Supreme Personality of Godhead.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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