श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 201
 
 
श्लोक  3.1.201 
तोमार यैछे विषय - त्याग, तैछे ताँर रीति ।
दैन्य - वैराग्य - पाण्डित्येर ताँहातेइ स्थिति ॥201॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने रामानंद राय से कहा, "सनातन गोस्वामी का भौतिक संबंधों का त्याग आपके जैसा ही है। उनमें विनम्रता, त्याग और उत्कृष्ट शिक्षा एक साथ विद्यमान हैं।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said to Ramanand Rai, "Sanatana Goswami's detachment from material relationships is like yours. Humility, detachment, and scholarship are found together in him."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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