श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  3.1.200 
इँहार ये ज्येष्ठ - भ्राता, नाम - ‘सनात न’ ।
पृथिवीते विज्ञ - वर नाहि ताँर सम ॥200॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, “श्रील रूप गोस्वामी के बड़े भाई, जिनका नाम सनातन गोस्वामी है, इतने बुद्धिमान और विद्वान हैं कि कोई भी उनके बराबर नहीं है।”
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “Srila Rupa Goswami's elder brother, whose name is Sanatana Goswami, is such a wise and learned scholar that no one can match him.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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