श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.1.20 
एक - दिन शिवानन्दे घाटियाले राखिला ।
कुक्कुरके भात दिते सेवक पासरिला ॥20॥
 
 
अनुवाद
एक दिन जब शिवानंद को एक चुंगीदार ने हिरासत में लिया था, तो उनका नौकर कुत्ते को पका हुआ चावल देना भूल गया।
 
One day when Shivananda was stopped by a tax collector, his servant forgot to give cooked rice (bhaat) to the dog.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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