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श्लोक 3.1.20  |
एक - दिन शिवानन्दे घाटियाले राखिला ।
कुक्कुरके भात दिते सेवक पासरिला ॥20॥ |
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| अनुवाद |
| एक दिन जब शिवानंद को एक चुंगीदार ने हिरासत में लिया था, तो उनका नौकर कुत्ते को पका हुआ चावल देना भूल गया। |
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| One day when Shivananda was stopped by a tax collector, his servant forgot to give cooked rice (bhaat) to the dog. |
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