श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 197
 
 
श्लोक  3.1.197 
प्रभु कहे, - “प्रयागे इहार हइल मिलन ।
इहार गुणे इहाते आमार तुष्ट हैल मन” ॥197॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "मैं प्रयाग में श्रील रूप गोस्वामी से मिला था। उन्होंने अपने गुणों से मुझे आकर्षित और संतुष्ट किया।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “I met Srila Rupa Goswami in Prayaga. He attracted and pleased me with his qualities.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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