श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 194
 
 
श्लोक  3.1.194 
प्रेम - परिपाटी एड़ अद्भुत वर्णन ।
शुनि’ चित्त - कर्णेर हय आनन्द - घूर्णन ॥194॥
 
 
अनुवाद
"रूप गोस्वामी के अद्भुत वर्णन प्रेम प्रसंगों को व्यक्त करने के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएँ हैं। इन्हें सुनकर हर किसी का हृदय और कान दिव्य आनंद के भंवर में डूब जाएँगे।"
 
"The wonderful descriptions given by Rupa Goswami are the best way to express the loving behavior. Listening to them will immerse everyone's heart and ears in a whirlpool of divine bliss.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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