श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 183
 
 
श्लोक  3.1.183 
राय कहे , - “कोन् अङ्गे पात्रेर प्रवेश ?” ।
तबे रूप - गोसा ञि कहे ताहार विशेष ॥183॥
 
 
अनुवाद
रामानन्द राय ने पूछा, "वादक शैली के किस उपविभाग में प्रवेश करते हैं?" तब रूप गोस्वामी ने इस विषय पर विशेष रूप से बोलना शुरू किया।
 
Ramanand Rai asked, “From which style subdivision (anga) do actors enter?” Rupa Goswami then began to speak specifically on this topic.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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