श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  3.1.181 
प्रभु कहे, - “राय, तोमार इहाते उल्लास ।
शुनितेइ लञा, लोके करे उपहास” ॥181॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मेरे प्रिय रामानन्द राय, आप इन काव्यात्मक अभिव्यक्तियों को सुनकर प्रसन्न हैं, लेकिन मुझे इन्हें सुनकर शर्म आ रही है, क्योंकि सामान्यतः लोग इस श्लोक के विषय पर मज़ाक करेंगे।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “My dear Ramanand Rai, you are happy to hear these poetic expressions, but I am ashamed to hear them, because ordinary people will laugh at the subject matter of this verse.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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