श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  3.1.149 
राय कहे , - “कह सहज - प्रेमेर लक्षण” ।
रूप - गोसाञि कहे, - “साहजिक प्रेम - धर्म” ॥149॥
 
 
अनुवाद
रामानन्द राय ने आगे पूछा, “भगवान के प्रति प्रेम जागृत करने के स्वाभाविक लक्षण क्या हैं?” रूप गोस्वामी ने उत्तर दिया, “भगवान के प्रति प्रेम के ये स्वाभाविक लक्षण हैं: रूप गोस्वामी ने उत्तर दिया, “भगवान के प्रति प्रेम के ये स्वाभाविक लक्षण हैं:
 
Ramanand Rai further asked, “What are the natural signs of the arising of love for God?” Rupa Goswami replied, “These are the natural signs of love for God”:
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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