श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  3.1.147 
राय कहे , - “कह देखि भावेर स्वभाव ?” ।
रूप कहे , - “ऐछे हय कृष्णा - विषयक ‘भाव” ॥147॥
 
 
अनुवाद
रामानन्द राय ने पूछा, “भावुक प्रेम की विशेषताएँ क्या हैं?” रूप गोस्वामी ने उत्तर दिया, “कृष्ण के प्रति भावुक प्रेम की प्रकृति ऐसी ही है:” रूप गोस्वामी ने उत्तर दिया, “कृष्ण के प्रति भावुक प्रेम की प्रकृति ऐसी ही है:”
 
Ramanand Rai asked, “What are the characteristics of emotional love?” Rupa Goswami replied, “This is the nature of emotional love for Krishna”:
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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