श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  3.1.137 
राय कहे , - “प्ररोचनादि कह देखि, शुनि?” ।
रूप कहे , - “महाप्रभुर श्रवणेच्छा जानि” ॥137॥
 
 
अनुवाद
रामानन्द राय ने कहा, "कृपया प्ररोचना वाला भाग सुनाइये ताकि मैं उसे सुन सकूँ और उसकी जाँच कर सकूँ।"
 
Ramanand Rai said, “Please recite the exhortation portion to me so that I can listen and examine it.” Sri Rupa replied, “I think Sri Chaitanya Mahaprabhu wishes to hear the exhortation.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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