श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  3.1.134 
राय कहे , - “कोन्आमुखे पात्र - सन्निधान ?” ।
रूप कहे , - “काल - साम्ये ‘प्रवर्तक’ नाम” ॥134॥
 
 
अनुवाद
रामानन्द राय ने पूछा, "आपने वादकों की सभा का परिचय कैसे दिया?"
 
Ramanand Rai asked, “How have you introduced the group of characters?” Rupa Goswami replied, “All the characters gather at the appropriate time under the title Pravartak.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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