श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.1.13 
वृन्दावन हैते प्रभु नीलाचले आइला ।
स्वरूप - गोसाञि गौडे वार्ता पाठाइला ॥13॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु वृन्दावन से जगन्नाथ पुरी लौटे, तो स्वरूप दामोदर गोसांई ने तुरंत बंगाल में भक्तों को भगवान के आगमन की खबर भेजी।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu returned to Jagannatha Puri from Vrindavan, Swarupa Damodara Gosandu immediately sent the news of Mahaprabhu's arrival to the devotees in Bengal.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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