| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट » श्लोक 127 |
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| | | | श्लोक 3.1.127  | राय कहे , - “नान्दी - श्लोक पड़ देखि, शुनि?” ।
श्री - रूप श्लोक पड़े प्रभु - आज्ञा मा नि’ ॥127॥ | | | | | | | अनुवाद | | रामानन्द राय ने कहा, "कृपया विदग्धामाधव का प्रारंभिक श्लोक सुनाएँ ताकि मैं उसे सुन सकूँ और उसका परीक्षण कर सकूँ।" इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु के आदेशानुसार श्री रूप गोस्वामी ने श्लोक (1.1) सुनाया। | | | | Ramanand Rai said, “Please recite the Nandi verse of Vidgadha Madhava, so that I may hear and examine it.” Thus, at the command of Sri Chaitanya Mahaprabhu, Sri Rupa Goswami recited the verse (1.1). | | ✨ ai-generated | | |
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