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श्लोक 3.1.126  |
विदग्ध - माधव आर ललित - माधव ।
दुइ नाटके प्रेम - रस अदभुत सब ॥126॥ |
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| अनुवाद |
| "इन दोनों नाटकों का नाम विदग्धा-माधव और ललिता-माधव है। दोनों ही भगवान के परमानंदपूर्ण भावनात्मक प्रेम का अद्भुत वर्णन करते हैं।" |
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| "These plays are called Vidgadha Madhava and Lalit Madhava. Both contain a wonderful description of the essence of love for God." |
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