श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  3.1.123 
राय कहे , - “कोन् ग्रन्थ कर हेन जानि ? ।
याहार भितरे ए इ सिद्धान्तेर खनि ?” ॥123॥
 
 
अनुवाद
रामानंद राय ने पूछा, "आप किस तरह का नाटक लिख रहे हैं? हम समझ सकते हैं कि यह निर्णायक कथनों का भंडार है।"
 
Ramanand Rai asked, "What kind of play are you writing? We can understand that it is a mine of conclusive theories."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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