श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  3.1.118 
प्रभु कहे, - “कह रूप, नाटकेर श्लोक ।
ये श्लोक शुनिले लोकेर याय दु:ख - शोक” ॥118॥
 
 
अनुवाद
तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मेरे प्रिय रूप, कृपया अपने नाटक से वह श्लोक सुनाइए, जिसे सुनने से सभी लोगों का दुःख और शोक दूर हो जाता है।"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “O dear Rupa, please recite that verse from your drama, on hearing which all the sorrows and griefs of people go away.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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