श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  3.1.109 
भक्त - सङ्गे प्रभु आइला, देखि’ दुइ जन ।
दण्डवत् हञा कैला चरण वन्दन ॥109॥
 
 
अनुवाद
जब हरिदास ठाकुर और रूप गोस्वामी ने देखा कि श्री चैतन्य महाप्रभु अपने अंतरंग भक्तों के साथ आये हैं, तो वे दोनों तुरन्त ही लकड़ी की तरह गिर पड़े और उनके चरण कमलों की स्तुति करने लगे।
 
When Haridasa Thakura and Rupa Goswami saw that Sri Chaitanya Mahaprabhu had come with His intimate devotees, they both immediately fell on the ground like a staff and worshipped His lotus feet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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