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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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लीला 3: अन्त्य लीला
अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट
अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड
अध्याय 3: श्रील हरिदास ठाकुर की महिमा
अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट
अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना
अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट
अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट
अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना
अध्याय 9: गोपीनाथ पट्टनायक का उद्धार
अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं
अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण
अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार
अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ
अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु का कृष्ण-विरह भाव
अध्याय 15: श्री चैतन्य महाप्रभु का दिव्य उन्माद
अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान
अध्याय 17: श्री चैतन्य महाप्रभु के शारीरिक विकार
अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव
अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार
अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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