श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.9.82 
श्री - वैष्णव एक , - ‘व्येङ्कट भट्ट’ नाम ।
प्रभुरे निमन्त्रण कैल करिया सम्मान ॥82॥
 
 
अनुवाद
तब वेणकट्ट भट्ट नामक एक वैष्णव ने श्री चैतन्य महाप्रभु को बड़े आदर के साथ अपने घर आमंत्रित किया।
 
Then a Vaishnava named Venkata Bhatta invited Sri Chaitanya Mahaprabhu to his house with great respect.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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