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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.9.71 
त्रिमलय दे खि’ गेला त्रिकाल - हस्ति - स्थाने ।
महादेव दे खि’ ताँरे करिल प्रणामे ॥71॥
 
 
अनुवाद
त्रिमालय में दर्शन करने के बाद, चैतन्य महाप्रभु त्रिकाल-हस्ति के दर्शन के लिए गए। वहाँ उन्होंने भगवान शिव के दर्शन किए और उन्हें प्रणाम किया।
 
After visiting Trimalaya, Sri Chaitanya Mahaprabhu went to Trikalahasti. It was there that he saw Lord Shiva and offered him all kinds of obeisances.
तात्पर्य
त्रिकाल हस्ती अथवा श्री काल हस्ती , तिरुपति से लगभग बाईस मील पूर्व में स्थित है। इसके पश्चिमी ओर सुवर्ण-मुखी नदी है। श्री काल हस्ती मंदिर नदी के दक्षिणी भाग में है। यह स्थान सामान्यतः श्री कालहस्ती अथवा कालहस्ती के नाम से जाना जाता है और भगवान शिव के इस मंदिर के लिए ऊर्जा स्थल है। इस मंदिर में उन्हें वायु-लिंग शिव कहते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)