| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ » श्लोक 364 |
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| | | | श्लोक 2.9.364  | चैतन्य - चरित श्रद्धाय शुने येइ जन ।
यतेक विचारे, तत पाय प्रेम - धन ॥364॥ | | | | | | | अनुवाद | | जितना अधिक कोई व्यक्ति श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं को श्रद्धापूर्वक सुनता है, उनका विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है, उतना ही अधिक वह भगवद् प्रेम की परमानंद सम्पदा को प्राप्त करता है। | | | | The more one listens to the pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu with devotion and studies them by interpretation, the more one acquires the wealth of love of God. | | ✨ ai-generated | | |
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