श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 358
 
 
श्लोक  2.9.358 
तीर्थ - यात्रा - कथा एइ कैलुँ समापन ।
सङ्क्षेपे कहिलुँ, विस्तार ना याय वर्णन ॥358॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्रा का संक्षिप्त वर्णन करके अपनी कथा समाप्त की है। इसका बहुत व्यापक वर्णन नहीं किया जा सकता।
 
Thus I have briefly completed the description of Sri Chaitanya Mahaprabhu's pilgrimage. It cannot be described in any further detail.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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