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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ
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श्लोक 346
श्लोक
2.9.346
जगन्नाथ - दरशन प्रेमावेशे कैल ।
कम्प - स्वेद - पुलकाश्रुते शरीर भासिल ॥346॥
अनुवाद
भगवान जगन्नाथ के दर्शन से उत्पन्न आनंदमय प्रेम के कारण श्री चैतन्य महाप्रभु के शरीर में कम्पन, पसीना, आँसू और उल्लास की बाढ़ आ गई।
While seeing Lord Jagannath, Mahaprabhu's body became filled with trembling, sweat, tears and excitement due to love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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