श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 343
 
 
श्लोक  2.9.343 
सार्वभौम भट्टाचार्य आनन्दे चलिला ।
समुद्रेर तीरे आसि’ प्रभुरे मिलिला ॥343॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य भी बड़ी प्रसन्नता से भगवान के दर्शन के लिए गये और समुद्र तट पर उनसे मिले।
 
Sarvabhauma Bhattacharya also went to meet Mahaprabhu with great joy, and they met on the seashore.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)