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श्लोक 2.9.329  |
दुइ जने कृष्ण - कथा कहे रात्रि - दिने ।
परम - आनन्दे गेल पाँच - सात दिने ॥329॥ |
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| अनुवाद |
| रामानन्द राय और श्री चैतन्य महाप्रभु दिन-रात कृष्ण पर चर्चा करते रहे और इस प्रकार उन्होंने पाँच से सात दिन तक बड़े आनन्द से बिताए। |
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| Ramanand Rai and Sri Chaitanya Mahaprabhu discussed the Krishna Katha day and night. In this way, they spent five or seven days in great joy. |
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