श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 321
 
 
श्लोक  2.9.321 
दुइ जने प्रेमावेशे करेन क्रन्दन ।
प्रेमानन्दे शिथिल हैल दुँहाकार मन ॥321॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों अत्यन्त प्रेमोन्मत्त होकर रोने लगे और इस प्रकार उनका मन शिथिल हो गया।
 
Both of them became emotional and started crying and thus their minds became relaxed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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