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श्लोक 2.9.321  |
दुइ जने प्रेमावेशे करेन क्रन्दन ।
प्रेमानन्दे शिथिल हैल दुँहाकार मन ॥321॥ |
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| अनुवाद |
| वे दोनों अत्यन्त प्रेमोन्मत्त होकर रोने लगे और इस प्रकार उनका मन शिथिल हो गया। |
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| Both of them became emotional and started crying and thus their minds became relaxed. |
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