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श्लोक 2.9.308  |
सौन्दर्य - माधुर्घ - कृष्ण - लीलार अवधि ।
सेइ जाने, ये ‘कर्णामृत’ पड़े निरवधि ॥308॥ |
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| अनुवाद |
| जो व्यक्ति निरंतर कृष्ण-कर्णामृत का पाठ करता है, वह भगवान कृष्ण की लीलाओं के सौंदर्य तथा मधुर रस को पूर्णतः समझ सकता है। |
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| One who regularly reads Krishnakarnamrita can understand the beauty of Lord Krishna and the sweet taste of His pastimes. |
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