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श्लोक 2.9.306  |
कृष्ण - कर्णामृत शुनि’ प्रभुर आनन्द हैल ।
आग्रह करिया पुँथि लेखाञा लैल ॥306॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु कृष्ण-कर्णामृत नामक ग्रन्थ सुनकर अत्यन्त प्रसन्न हुए और बड़ी उत्सुकता से उन्होंने उसकी प्रतिलिपि बनवाई और उसे अपने साथ ले गए। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu was very pleased to hear the book Krishnakarnamrita and he eagerly got it copied and took it with him. |
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