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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 305
 
 
श्लोक  2.9.305 
ब्राह्मण - समाज सब - वैष्णव - चरित ।
वैष्णव सकल पड़े ‘कृष्ण - कर्णामृत’ ॥305॥
 
 
अनुवाद
वहाँ का ब्राह्मण समुदाय शुद्ध भक्तों से बना था। वे नियमित रूप से बिल्वमंगल ठाकुर द्वारा रचित कृष्ण-कर्णामृत नामक ग्रंथ का अध्ययन करते थे।
 
The Brahmin community there consisted of pure devotees who regularly studied the book Krishnakarnamrit written by Bilvamangal Thakur.
तात्पर्य
यह पुस्तक 112 श्लोकों में बिल्वमंगल ठाकुर जी ने लिखी थी। इसी नाम से दो या तीन पुस्तकें और भी हैं, और बिल्वमंगल की पुस्तक पर दो टीकाएँ भी हैं। एक टीका कृष्णदास कविराज गोस्वामी ने लिखी थी और दूसरी चैतन्य दास गोस्वामी ने।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)