श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 300
 
 
श्लोक  2.9.300 
एइ तीर्थे शङ्करारण्येर सिद्धि - प्राप्ति हैल ।
प्रस्तावे श्री - रङ्ग - पुरी एतेक कहिल ॥300॥
 
 
अनुवाद
श्री रंग पुरी ने श्री चैतन्य महाप्रभु को सूचित किया कि शंकरण्य नाम के संन्यासी ने उस पवित्र स्थान, पंडरपुर में पूर्णता प्राप्त की थी।
 
Sri Ranga Puri told Sri Chaitanya Mahaprabhu that in this very pilgrimage place, Pandarpur, a monk named Shankararanya had attained Siddhi.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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