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श्लोक 2.9.29  |
रमन्ते य़ोगिनोऽनन्ते सत्यानन्दे चिदात्मनि ।
इति राम - पदेनासौ परं ब्रह्माभिधीयते ॥29॥ |
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| अनुवाद |
| 'परम सत्य को राम इसलिए कहा जाता है क्योंकि अध्यात्मवादी आध्यात्मिक अस्तित्व के असीमित सच्चे आनंद में आनंद लेते हैं।' |
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| “The ultimate truth is called Rama, because spiritualists rejoice in the infinite real happiness of spiritual existence.” |
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