श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.9.29 
रमन्ते य़ोगिनोऽनन्ते सत्यानन्दे चिदात्मनि ।
इति राम - पदेनासौ परं ब्रह्माभिधीयते ॥29॥
 
 
अनुवाद
'परम सत्य को राम इसलिए कहा जाता है क्योंकि अध्यात्मवादी आध्यात्मिक अस्तित्व के असीमित सच्चे आनंद में आनंद लेते हैं।'
 
“The ultimate truth is called Rama, because spiritualists rejoice in the infinite real happiness of spiritual existence.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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