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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ
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श्लोक 278
श्लोक
2.9.278
एइ - मत ताँर घरे गर्व चूर्ण करि’ ।
फल्गु - तीर्थे तबे चलि आइला गौरहरि ॥278॥
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु ने तत्ववादियों का अभिमान चूर-चूर कर दिया। तत्पश्चात् वे फल्गु-तीर्थ नामक पवित्र स्थान पर गए।
In this way, Sri Chaitanya Mahaprabhu shattered the pride of the philosophers. Then he went to Phalgu Tirtha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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