श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 273
 
 
श्लोक  2.9.273 
शुनि’ तत्त्वाचार्य हैला अन्तरे लज्जित ।
प्रभुर वैष्णवता देखि, हइला विस्मित ॥273॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की बात सुनकर, तत्त्ववाद संप्रदाय के आचार्य अत्यंत लज्जित हुए। श्री चैतन्य महाप्रभु की वैष्णव धर्म में दृढ़ आस्था देखकर, वे आश्चर्यचकित हो गए।
 
After listening to the words of Sri Chaitanya Mahaprabhu, the Acharya of the Tattvavadi sect became extremely ashamed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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