श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 270
 
 
श्लोक  2.9.270 
नारायण - पराः सर्वे न कुतश्चन बिभ्यति ।
स्वर्गापवर्ग - नरकेष्वपि तुल्यार्थ - दर्शिनः ॥270॥
 
 
अनुवाद
"भगवान नारायण का भक्त नारकीय स्थिति से नहीं डरता, क्योंकि वह उसे स्वर्ग प्राप्ति या मोक्ष के समान ही मानता है। भगवान नारायण के भक्त इन सभी चीज़ों को एक ही स्तर पर देखने के आदी होते हैं।"
 
"A devotee of Lord Narayana does not fear hell, because he considers it the same as going to heaven or attaining salvation. Devotees of Lord Narayana are accustomed to considering these things the same."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd