श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 258
 
 
श्लोक  2.9.258 
प्रभु कहे, - शास्त्रे कहे श्रवण - कीर्तन ।
कृष्ण - प्रेम - सेवा - फलेर ‘परम - साधन’ ॥258॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "शास्त्रों के अनुसार, श्रवण और कीर्तन की प्रक्रिया कृष्ण की प्रेममयी सेवा प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन है।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “According to the conclusions of the scriptures, the best means to attain loving devotional service to Krishna are hearing and chanting.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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