श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  2.9.247 
गोपी - चन्दन - तले आछिल डिङ्गाते ।
मध्वाचार्य सेइ कृष्ण पाइला कोन - मते ॥247॥
 
 
अनुवाद
माधवाचार्य ने किसी न किसी तरह से नाव में लाये गये गोपी-चन्दन के ढेर से कृष्ण के विग्रह को प्राप्त कर लिया था।
 
Madhvacharya somehow obtained this idol of Krishna from the pile of Gopichandan that was brought in the boat.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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